गंगा की बाढ़ से ग्रामीणों के हौसले पस्त, कर्मचारी मस्त

बाढ चौकियों पर नहीं है कोई व्यवस्था और न ही कोई अधिकारी

हनुमानगंज,प्रयागराज:(स्वतंत्र प्रयाग):गंगा की तेज बाढ से जहाँ तटीय इलाकों के किसानों और ग्रामीणों के हौसले पस्त हो गये हैं वही बाढ़ प्रभावित लोगों की सहायता के लिए बनी बाढ चौकियों पर न तो कोई व्यवस्था है और प्रभावित लोगों की सुनने वाला कोई इन चौकियों पर कोई नहीं है शासन की सारी व्यवस्था महज कागजी खानापूर्ति दिख रही है

       जनपद प्रयागराज की फूलपुर तहसील के ढोकरी,लीलापुर कलां, लीलापुर खुर्द,कोटवा, बेलवार,जमुनीपुर, दुबावल,ककरा उपरहार, पट्टी बैरी शाल,लुडेरनपुर, नीबी,भदकार, छतनाग, हवेलिया,बदरा,सोनौटी, हेतापट्टी सहित दो दर्जन से अधिक गाँव गंगा नदी के तट पर बसे है बाढ की विभिषिका से बचने के लिए इन तटीय इलाकों में आधा दर्जन बाढ़ चौकियाँ बनी है।

जो बाढ़ आने पर प्रभावी कार्यवाही करती है तहसील कर्मियों के दिशा निर्देश में पशुपालकों के जानवरों को गंगा नदी के इस पार सुरक्षित ले आना तथा बाढ मे फसे लोगो को सुरक्षित स्थान पर पहुंचाने के साथ बाढ की जद में अपना घर खो चुके लोगों को सुरक्षित बचाना और उनके भोजन आदि की व्यवस्था करना इन बाढ चौकियों के जिम्मे होता है ढोकरी,लीलापुर कलां,और,दुर्वासा आश्रम और बदरा सोनौटी तक इस तटीय इलाके के लिए मोक्षदायिनी गंगा बाढ मे अभिशाप बन जाती है।

 जब से बाढ का पानी खतरे के लाल निशान को पार किया है तब से इन कछारी इलाके के किसानों और पशुपालकों के हौसले पस्त हो गये हैं जहाँ अपने जानवरों को सुरक्षित उतारने की आपाधापी सब में मची है वही लचर व्यवस्था के पर्याय बने तहसील कर्मी  मोटर वोट को कौन कहे,साधारण वोट भी नहीं दे पा रहे हैं।

 ककरा उपरहार के प्रधानपति इन्द्रमणि तिवारी का आरोप है कि दुर्वासा आश्रम पर सिर्फ नाम मात्र के बाढ़ चौकी है यहाँ प्रभावित लोगों की सुनने वाला और सरकारी व्यवस्था की जानकारी देने के लिए कोई उपस्थित नहीं रहता जहाँ एक तरफ गंगा नदी का जल स्तर तेजी से बढ़ रहा है वही प्रशासन की तरफ से दी जाने वाली सुविधा की गति बहुत धीमी है।

 हालात यही रहे तो अपनी फसल खो चुके किसानों को अपने जानवरों को भी खोना पड जायेगा प्रधानपति ने बताया कि इस सम्बन्ध में मैंने कई बार तहसीलदार फूलपुर और उपजिलाधिकारी फूलपुर से वोट और मोटर वोट दिलाने के लिए बात किया किन्तु उन्होंने हल्का लेखपाल से बात करने की बात कह कर फोन काट दे रहे है इन गैर जिम्मेदार अधिकारियों और कर्मचारियों के मत्थे तो दस पांच फीसदी जानवरों को नदी के इस पार सुरक्षित नहीं उतारा जा सकता तहसील प्रशासन और जिला प्रशासन की इस गैर जिम्मेदाराना कार्य प्रणाली पर ग्रामीणों में आक्रोश है।

आलोक उपाध्याय 

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