दस दिवसीय कजरी कार्यशाला के पांचवें दिन धुन मुनिया कजरी कि एक झलक

 


गोरिया गावै देखा सावन में कजरिया ना


प्रयागराज:(स्वतंत्र प्रयाग): लोक संस्कृति विकास संस्थान प्रयागराज द्वारा आयोजित दस दिवसीय निःशुल्क कजरी कार्यशाला के पाँचवे दिन धुनमुनिया कजरी एवं शायरी कजरी प्रतिभागियों को सिखाई गई। 

कार्यशाला में कुल 40 महिलाओं को प्रवेश दिया गया है। कार्यशाला के संयोजक शरद कुमार मिश्र ने कहा कि - कजरी की सबसे बड़ी खासियत इसकी मिठास है। 

 जिसमें न सिर्फ प्रेमी-प्रेमिकाओं की संवेदनाएं देखने को मिलती हैं बल्कि इनमे ननद-भाभी के संबंधों का खूबसूरत ताना-बाना तो कभी सहेलियों के बीच झूलों पर हो रही हंसी-ठिठोली भी सुनने को मिलती है।  

कजरी की एक बेहद विशिष्ट शैली ‘धुनमुनिया’ थी, जिसमें महिलायें एक दूसरे का हाथ पकड़ कर गोल घेरा बनाकर कजरी गाती थी, मगर अब ये कहीं नजर नहीं आती। कार्यशाला में आयी प्रतिभागी बहने अवश्य कजरी को संजोने का कार्य करेंगी। कार्यशाला के प्रशिक्षक लोक कलाविद उदय चंद्र परदेसी हैं वहीं  सह संयोजन लोक गायिका प्रिया द्विवेदी कर रही हैं।

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