गाँवो के शिक्षा के मंदिरों पर लगा कोरोना का डबल ग्रहण

     

लखीमपुर खीरी ब्यूरो:(स्वतंत्र प्रयाग): जिस तरह देश ने दो बार का कोरोना का कहर झेला है और लगातार तीसरी लहर के लिये सावधान रहने के लिये सरकार द्वारा कहा जा रहा है।

 सवाल यह है अगर तीसरी लहर आई तो उसका असर पहली लहर वाली होगी या दूसरी लहर जैसी कहर    बर पाएगी फिलहाल यह केवल एक आकलन है भविष्य में होने वाली घटना को लेकर की अगर यह हुआ तो क्या होगा पर हम आज बात करेगे गाँवो के शिक्षा मन्दिर यानी ग्रामीण इलाकों के स्कूल की जिसमे आज ताले लटक रहे है।

 पिछले वर्ष में भी कोरोना के कहर ने ग्रामीण इलाको के स्कूलो को काफी नुकसान पहुँचाया था फिर एक बार गाँवो के स्कूलो को दूसरी लहर ने भी अपना कहर बरपाया आपको बताते चले कि गाँवो में पढ़ाई का शत्र जुलाई माह से शुरू हो जाता है।

पर सरकार का अभी स्कूलो के प्रति किसी तरह से कब खुलेगा ऐसा कोई आदेश नही आया।

 इस कारण गाँवो में अभिभावक अभी स्कूलो में प्रवेश नही करवा रहे है बात करे शहर के स्कूलो की वहाँ ऑनलाइन पढाई करवाके फीस बराबर वसूल की जा रही है पर ग्रामीण इलाकों के बच्चों के पास न तो एंड्रॉइड फोन है न ही पढ़ाई का कोई अन्य साधन पर इन सबके बीच अगर कोई सबसे जादा दुखी है तो वह इंसान सबसे ज्यादा दुखी है  जो  बच्चों को भविष्य के डॉक्टर वैज्ञानिक नेता पढ़ाकर तैयार करते है।

  पर आज उन प्राइवेट अध्यापकों का दर्द देंखने वाला भी कोई नही है सरकार ने न तो आज तक किसी तरह से प्राइवेट अध्यापकों को किसी योजना के तहत कोई मदद दी।

न ही कोई आश्वासन  दिया  की गाँवो के स्कूलो के अध्यापक आज दूसरे कामो की तरफ रुख कर रहे है क्योंकि स्कूलो से  फीस न मिलने की बात कर रहे है वो कहते है जब स्कूल ही बन्द है जब फीस नही है तो हम लोग कहा से दे ऑनलाइन पढाई की बात करने पर एक प्राइवेट स्कूल के प्रबन्धक ने बताया की गाँव मे किसी बच्चे के पास एंड्रॉइड फोन नही है अगर है भी तो अभिभावक ऑनलाइन पढ़ाई के प्रति जागरूक नही है।

  एक स्कूल प्रबन्धक ने बताया कि वो पिछले दो वर्ष से लगातार स्कूल में हो रहे नुकसान से बहुत परेसान है ऊपर से अध्यापक भी बहुत परेसान है आखिर क्या करे जिससे साथी अध्यापक को दो वख्त की रोटी मिल सके वही उनका कहना है कि लगातार अध्यापक बुलाकर ऑनलाइन पढ़ाई करवाई पर किसी बच्चे ने फीस तक नही जमा करी आखिर कबतक ऐसे चलेगा फूलबेहड़ में  प्राईवेट स्कूल चलाने वाले प्रबन्धक ने बताया की गाँवो में आनलाइन पढ़ाई के लिये बहुत बार अभिभावकों से सम्पर्क किया गया जिसके बाद भी अभिभावक ऑनलाइन पढाई को नही समझते है वही शहर के स्कूलो में ऑनलाइन पढ़ाई चल रही है और सबको फीस मिल रही है आख़िर सरकार कुछ तो मदद करे जिससे प्राइवेट स्कूल के अध्यापक भी अपने परिवार का पेट पाल सके।

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