आस्तित्व खोने की कगार पर है भगवान श्री राम की विश्राम स्थली पौराणिक सकरौरा घाट

 


गोण्डा(स्वतंत्र प्रयाग) जिला मुख्यालय से मात्र 30 किलोमीटर दूरी पर स्थित भगवान श्रीराम की विश्राम स्थली सकरौरा घाट प्रशासन और जनप्रतिनिधियों की अनदेखी कर कारण अपनेअस्तित्व खोने की कगार पर पहुँच बदहाली के आँसू बहा रहा है। सकरौरा घाट से क्षेत्र के लाखों लोगों की आस्था जुड़ी हुई है यहां पर कभी मां सरयू की पवित्र धारा का प्रवाह हुआ करता था जिसमें प्रतिदिन हजारों की संख्या में भक्तगण डुबकी लगाकर मन्नते मांगते थे किंतु जनप्रतिनिधियों की अनदेखी तथा समय के साथ मां सरयू इस स्थान को छोड़कर कोसों दूर चली गई। तब से यह स्थान उपेक्षा का शिकार होता चला गया। यहां की दर्जनो मंदिरे धर्मशाला आज जर्जर हो चुकी हैं कई मंदिरो से भगवान की मूर्तियां भी लापता हो चुकी हैं। कई मंदिरों और धर्मशाला अपनी पहचाना भी खो चुका है। फिर भी जिम्मेदारों की लापरवाही से पौराणिक स्थल अपने बदहाली के आंसू रो रहा है। सकरौरा घाट का आयोध्या औऱ भगवान श्री राम से पुराना नाता है सकरौरा घाट अयोध्या के 84 कोशी परिक्रमा मार्ग में भी आता था। इस के समीप महर्षि अगस्त्य का कुंड भी हुआ करता था। पौराणिक मान्यता के अनुसार एक बात देवताओं ने नेमिषारण्य में यज्ञ का आयोजन की गया था जिसमे शामिल होने के लिए अगस्त मुनि भी पहुँचे थे यज्ञ के उपरांत जब महर्षि अगस्त्य वापस आ रहे थे तो उन्होंने सकरौरा घाट के समीप स्नान ध्यान और विश्राम किया था। तब उस समय आयोध्या के राजा भगवान श्रीराम अपने भाईयों समेत दर्शन करने आये थे तब उन्होंने सकरौरा घाट पर ही रात्रि विश्राम किया था। किन्तु आज ये पौराणिक स्थान अपने बदहाली पर आँसू बहता नजर आ रहा है। जहाँ एक तरफ सरकार प्रचीन धरोहरों के संरक्षण की बात करती है वहीँ दूसरी तरफ आज सकरौरा घाट बदहाली के आंशू रो रहा है।

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