सरकार बदली पर नही बदली किसानों की तकदीर

आशीष श्रीवास्तव   

    लखीमपुर खीरी(स्वतंत्र प्रयाग)चीनी का कटोरा कहा जाने वाला उत्तर प्रदेश आज गन्ने के भुगतान के लिये मील कसानो को खून के आंसू रुला रही है।

भले ही सरकार बदली पर नही बदली किसानों की तकदीर आज भी किसान एक एक रुपये को मोहताज है आज हम बात कर रहे है गन्ना किसानों की जिनकी किस्मत आज भी वैसे की वैसी ही है जैसी पूर्व की सरकारों में थी हम बात करेगे उत्तरप्रदेश की भाजपा सरकार की जो 2017 में बनी थी।

 तब चुनाव प्रचार करने देश के प्रधानमन्त्री नरेंद्र मोदी ने भरी सभा मे लाखो लोगो के बीच एक वादा किया था वह वादा था उत्तरप्रदेश मे भाजपा सरकार अगर सत्ता में आई तो गन्ना भुगतान 14 दिनों के अंदर में होगा खैर भारी बहुमत से भाजपा सरकार प्रदेश में काबिज हुई प्रदेश की कमान गोरखपुर के सासंद योगी आदित्यनाथ को सौंप दी गई साथ दो उप मुख्यमंत्री भी प्रदेश को दिए गए पर अगर नही बदली तो किसानों की किस्मत जो जस की तस है।

लखीमपुर खीरी में कुल 9 गन्ना मील है जिसमे जिले ओर आस पास से जिले भर का गन्ना आता है पर किसानों को नही मिलता है तो वह है अपनी मेहनत का पैसा हम आज बात कर रहे है लखीमपुर से सटे बजाज हिन्दुस्तान की जो खम्भारखेड़ा मिल जिसका भुगतान इस वर्ष का तो दूर पिछले सत्र के भुगतान के लिये लोग आज भी बैंकों के चक्कर लगा रहे है।

लगातार दो वर्षों से कोरोना जैसी भीषण त्रासदी जिसमे देश को लाकड़ाऊंन तक करने की नॉबत आ गई महीनों बन्द रहे देश मे आखिर किसानों के घर का चूल्हा कैसे जला होगा।

 यह सोच कर रूह कांप जाती है पर अगर दिल नही पसीजता तो मिल प्रसासन का योगी आदित्य नाथ की सरकार बनते ही योगी ने गोहत्या अधिनियम बना कर एक अच्छा कार्य तो किया पर लोगो ने ही इसका मजाक बना दिया गायों को पाल कर जब तक दूध दिया तब तक पाला इसके बाद छोड़ दिया जो खेतो में बोई फसलो को भारी नुकसान पहुँचाती है।

जबकि सरकार की तरफ से गोशालाओं के लिये करोङो का बजट है पर अधिकारियों की उदासीनता के कारण सब राम भरोसे ही है आज जब पत्रकार ने किसानों से बात की तो किसान का गला रुंध आया मुँह से आवाज तक नही निकल रही तो किसान ने बताया कि पिछले साल को गन्ने की कुछ फसल सूख गई थी ।

 जो बची उसका पैसा नही मिला जबकि उधार लेकर गन्ने की बुवाई की थी और इस बार भी गन्ना बोया है जिसकी रखवाली के लिये दिन रात खेत मे जानवरो से बचाने के लिये रुकना पड़ता है जबकि गोशाला है पर गाय दर्जनों की संख्या में आती है पूरी फसल खा जाती है आखिर किसान क्या करे सरकार आखिर किसानो के मुद्दे पर चुप क्यो हो जाती है किसान कहॉ जाय किसको अपना दुखड़ा सुनाए ।

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