बुधवार, 9 जून 2021

सक्रिसिल ने विकास दर अनुमान घटाकर 9.5 प्रतिशत किया

 


 नई दिल्ली (स्वतंत्र प्रयाग): निवेश सलाह एवं साख निर्धारण एजेंसी क्रिसिल ने कोविड-19 की दूसरी लहर के मद्देनजर चालू वित्त वर्ष के लिए सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) वृद्धि दर का अनुमान घटाकर 9.5 प्रतिशत कर दिया है। एजेंसी ने अपनी पिछली रिपोर्ट में वृद्धि दर 11 प्रतिशत रहने का अनुमान जारी किया था। इस प्रकार उसने विकास अनुमान में 1.5 फीसदी की कटौती की है। उसने आज एक प्रेस विज्ञप्ति में बताया कि अर्थव्यवस्था धीरे-धीरे पटरी पर आने का प्रयास कर रही थी, लेकिन महामारी की दूसरी लहर ने इस पर पानी फेर दिया। अब संक्रमण की रफ्तार काफी कम हो गई है, फिर भी पहली लहर के चरम के समय से यह अब भी अधिक है। तीसरी लहर के खतरे की वजह से राज्य सरकारें लॉकडाउन पूरी तरह हटाने से इस बार बचेंगी। क्रिसिल ने बताया कि विकास का पूर्वानुमान यह मानकर तैयार किया गया है कि कोविड-19 से जुड़े प्रतिबंध अगस्त तक जारी रहेंगे और आवाजाही किसी न किसी प्रकार प्रभावित रहेगी। आने वाले महीनों में आर्थिक विकास की रफ्तार सीधे तौर पर टीकाकरण की रफ्तार पर निर्भर करेगी।क्रिसिल ने बताया कि विकास का पूर्वानुमान यह मानकर तैयार किया गया है कि कोविड-19 से जुड़े प्रतिबंध अगस्त तक जारी रहेंगे और आवाजाही किसी न किसी प्रकार प्रभावित रहेगी। आने वाले महीनों में आर्थिक विकास की रफ्तार सीधे तौर पर टीकाकरण की रफ्तार पर निर्भर करेगी।


सरकार ने इस साल दिसंबर तक 18 वर्ष से अधिक उम्र के सभी लोगों का टीकाकरण करने की योजना बनाई है। क्रिसिल का कहना है कि यदि इस लक्ष्य का 70 प्रतिशत भी हासिल कर लिया जाता है तो विकास दर 9.5 प्रतिशत रहेगी। टीकारण की गति यदि धीमी रहती है या देश को महामारी की तीसरी लहर का सामना करना पड़ता है तो विकास दर आठ प्रतिशत तक भी सीमित रह सकती है।चालू वित्त वर्ष की पहली तिमाही में जीडीपी विकास दर कोविड-पूर्व स्तर पर पहुंच गई थी, लेकिन दूसरी लहर के कारण पहली तिमाही में काफी बुरा प्रभाव पड़ा है और अब कोविड-पूर्व स्तर तक पहुंचने के लिए कुछ तिमाहियों का इंतजार करना पड़ेगा।रिपोर्ट में कहा गया है, “ इन सभी अनिश्चितताओं के बीच एकमात्र उम्मीद की किरण देश का निर्यात है। अमेरिका, ब्रिटेन और पूर्व एशियाई देशों में आर्थिक सुधार के कारण निर्यात बढ़ने की उम्मीद है।”क्रिसिल ने सरकार से कहा है कि संकट की इस घड़ी में उसे इससे सबसे अधिक प्रभावित लोगों की मदद के लिए उचित वित्तीय नीतियां बनानी चाहिये। वित्तीय नीतियां अंतिम पायदान पर खड़े लोगों तक पहुंचने में मौद्रिक नीति के मुकाबले कहीं अधिक सक्षम हैं

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