भारतीय स्टाम्प अधिनियम 1899 की धारा 31 मे पूर्व प्राविधानित व्यवस्था मे आंशिक परिवर्तन

 

                    

चित्रकूट (स्वतंत्र प्रयाग)सहायक महानिरीक्षक निबंधन उमेश चंद्र गुप्ता ने बताया कि उत्तर प्रदेश शासन स्टांप एवं रजिस्ट्रेशन लखनऊ द्वारा 15 जून 2021 के निर्देशों के क्रम में सर्वसाधारण को सूचित किया जाता है कि भारतीय स्टांप अधिनियम 1899 की धारा 31 में पूर्व प्रावधानित व्यवस्था में जनता को यह सुविधा प्रदान की गई है कि वो अपने विलेखों को उप निबंधक कार्यालय में पंजीकरण कराने से पूर्व उस पर प्रभार्य स्टांप शुल्क का आधिनिर्णय जिले के कलेक्टर से करा सकते हैं एवं धारा 32 के अनुसार ऐसे अधि निर्णय के उपरांत कलेक्टर से प्राप्त प्रमाणन के बाद उस विलेख में भविष्य में स्टांप शुल्क की अतिरिक्त प्रभार्यता का प्रश्न नहीं उठाया जा सकता। उपरोक्त अधिसूचना 15 जून 2021 के क्रम में सूचित किया जाता है कि जो भी व्यक्ति अपने विलेखों को उप निबंधक कार्यालय में पंजीकरण कराने से पूर्व उस पर प्रभार्य स्टांप शुल्क का अधिनिर्णय जिले के कलेक्टर से कराना चाहते हैं वो स्टांप एवं रजिस्ट्रेशन विभाग के नाम एक सौ रुपए जमा कर जमा धनराशि की चालान की प्रति के साथ अपने विलेख के मसौदे को प्रार्थना पत्र के साथ विलेख पर प्रभार्य समुचित स्टांप शुल्क के न्याय निर्णय हेतु कलेक्टर के समक्ष आवेदन प्रस्तुत कर सकते हैं। प्रभार्य स्टांप शुल्क की राशि निश्चित करने हेतु आवेदक द्वारा आवेदन के साथ इस तथ्य का एक शपथ पत्र भी जिले के कलेक्टर के समक्ष प्रस्तुत करना अनिवार्य होगा कि उसके द्वारा संपत्ति के मूल्यांकन हेतु समस्त तथ्य एवं परिस्थितियां सत्यता पूर्वक व्यक्त कर दिए गए हैं।

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