मंगलवार, 1 जून 2021

Coronavirus से घबराएं नहीं,दो बूंद नींबू का रस लें, पिएं हल्दी युक्त गुनगुना पानी :-पूर्व डीजीपी मैथिलीशरण गुप्त

 

पूर्व डीजीपी म.प्र.ने प्रधानमंत्री जी को पूर्व पत्रों के संदर्भ के संज्ञान में पुनः लिखा पत्र

प्रयागराज/भोपाल आज देश में कोरोना वायरस का संक्रमण होने पर नासिका छिद्रों में नींबू के रस की दो बूंदों के उपयोग से मात्र से ही इस महा त्रासदी से सफलतापूर्वक निपटने की क्षमता के संदर्भ में लिखे गये मेरे पूर्व पत्रों का संदर्भ ग्रहण करें।  

मैंने यह पत्र अपने देश के प्रति जिम्मेवारी का पूर्ण अहसास के साथ लिखे गये थे। खेद का विषय है कि मुझे अब तक किसी जिम्मेदार अधिकारी से कोई अनुकूल प्रतिक्रिया प्राप्त नहीं हुई है अधिकारी इस बारे में पूरी तरह से असहाय व लाचार प्रतीत हो रहे है। मै समझ नही पा रहा हूँ कि उनकी इस विवशता एवं लाचारी का कारण क्या है?

मुझे देश के प्रत्येक कोने से लगातार लोगों के द्वारा इससे लाभान्वित होने के शुभ समाचार मिल रहे हैं इस कारण मुझे व्यक्तिगत स्तर पर इसकी प्रमाणिकता पर तनिक भी संदेह नही रह गया है। 

अत्यंत हर्ष का विषय है कि अंततः मुझे नींबू रस की कोरोना वायरस को सीधे सम्पर्क में आने पर मारने की क्षमता को निम्नानुसार वैज्ञानिक ढंग से सत्यापित करने में सफलता मिली है--

हमने RT-PCR टेस्ट करने वाली लैब से सम्पर्क कर उन्हें दो-दो सेम्पल नाक व मुंह के एकत्रित कराए व जो सेम्पल कोरोना पॉजिटिव पाए गए उनके दूसरे सैंपल को 3 मि.ली. नींबू रस में डुबोया व पुनः टेस्ट करने पर यह पाया गया कि नींबू रस के द्वारा कोरोना वायरस की बाहरी सतह के साथ-साथ RNA को भी तोड़कर इसे पूर्णतः नष्ट कर देना पाया गया। 

अतः नींबू रस कोरोना वायरस को मारने में सक्षम है यह तथ्य अब वैज्ञानिक ढंग से प्रमाणित हो चुका है। नासिका से दी गयी दो दो बूँदें अपर रेस्पिरेटरी ट्रैक्ट में स्थित सभी कोरोना वायरस को कुछ ही क्षणों में पूर्णतया नष्ट करने व एपिग्लोटिस को स्टीमुलेट कर व उल्टी कारित कर 80% कोरोना वायरस को लोड को कम करने की क्षमता को जानते हुए लोगों को मरने व धन लोलुप लोगों के रहमोकरम पर छोड़ना क्या अत्यंत ही भयावह नही है?

 मैं स्वयं पिछले 47 दिनों से नींबू का रस नासिका छिद्रों में डाल रहा हूं यह पूर्णतया सुरक्षित है बल्कि यह श्वसन से जुड़ अधिकांश बीमारियों को भी दूर करेगा व आपका श्वसन का अहसास भी गहरा व बेहतर हो जाएगा। यह तथ्य मैं व्यक्तिगत अनुभव के आधार पर लिख रहा हूँ।

चिंताजनक है कि हमारी शासकीय न्यूज एजेंसी बिना जमीनी सत्यापन किये इस थेरेपी के फर्जी होने पर मुहर लगाकर उन तत्वों का साथ दे रही है जो इस त्रासदी का अनुचित लाभ उठाकर अकूत धन कमाने में लगी हुई हैं। 

देश के प्रसिद्ध टीवी चैनलों को इस थेरेपी को कोरोना वायरस से भी घातक बताने में व जनता को भ्रमित करने में तनिक भी लज्जा नहीं आ रही है। एक अध्यापक का नींबू के रस से मरने की गलत खबर को को प्रचारित करना दुर्भाग्यपूर्ण नहीं है देश की जनता, इन चैनल पर विश्वास कर नींबू रस जैसे वृह्नास्त्र के चमत्कारिक लाभ से वंचित हो रही है। मुझे विश्वास है एक दिन आप जरूर इन लोगों के इस गैर जिम्मेदाराना कृत्य के विरुद्ध प्रभावी कदम उठायेंगे।

जितना मै इस विषय में चिकित्सकों व अन्य संबंधित व्यक्तियों से चर्चा कर रहा हूं उतना चिकित्सकों के द्वारा भय का वातावरण कर धन कमाने की कुत्सित स्थितियां सामने आ रही है व गलत प्रोटोकॉल के पालन के कारण विषम परिस्थितियां पैदा हो रही है। आप चिकित्सकों से निम्न सवाल करना चाहेंगे-

1-हमारे शरीर जब भी कोई इन्फेक्शन होता है तो हमारा डिफेंस सिस्टम हमारे शरीर का तापमान बढ़ाकर हमें इससे लड़ने में मदद करता है। हमारे चिकित्सकों द्वारा 101*F के पहले पेरासिटामोल या अन्य ड्रग देकर तत्काल तापमान नीचे लाना क्या गलत नहीं है? बॉडी की सामान्य डिफेंस मैकेनिज्म को शिथिल कर हमारा नुकसान नहीं किया रहा है उन्हें चाहिए कि शरीर की रोग से लड़ने की प्राकृतिक शक्ति को अपना काम करने का पूरा मौका दे व रेफरी की तरह नजर रखे व आवश्यकता पड़ने पर विशेष परिस्थितियों में ही पेरासिटामोल दें ।

2-एंटीबायोटिक कोरोना या अन्य किसी भी वायरस से लड़ने में पूरी तरह से निष्प्रभावी है यह अच्छी तरह से जानते हुए भी शुरू से ही हमारे डॉक्टर हैवी एंटीबायोटिक दवाइयां देकर, बड़ी संख्या में, उन बैक्टीरिया को भी मार देने के लिये जिम्मेदार नहीं है जो हमारी पाचन एवं अन्य आवश्यक प्रक्रियाओं में मदद करते है।अतः केवल अतिविशिष्ठ परिस्थितियों में बैक्टीरिया की उपस्थिति के उचित प्रमाण होने पर ही एंटीबायोटिक दवाइयां देना उचित ठहराया जा सकता है।

3-स्टीरोइड अंतिम विकल्प के तौर पर अति आवश्यक परिस्थितियों में ही दिया जाना चाहिए जबकि इन्फेक्शन फेफड़ों में प्रवेश कर घातक स्थिति के साक्ष्य उपलब्ध होने पर ही दिया जाना उचित ठहराया जा सकता है, लेकिन कुछ चिकित्सक इसे शुरू में देकर हमारी इम्यूनिटी को लड़ने का अवसर न देकर 1000% की भयानक गति से बढ़ रहे कोरोना वायरस जिसे विध्वंस करने के लिए 14 दिन का समय उपलब्ध है उसे घातक स्थिति निर्मित करने के लिए खुला नहीं छोड़ दे रहे हैं?

4-यदि एलोपैथी में हमारी इम्यूनिटी बढ़ाने के सार्थक उपाय नहीं है तो हमें शुरू के फेज में अन्य पैथी की मदद लेकर कार्यवाही करना मरीज के ज्यादा हित में होगा व सभी पैरामीटर पर कड़ी नजर रखी जाये व सही समय आने पर परिस्थितिजन्य साक्ष्यों के आधार पर ही स्टीरोइड एवं ऑक्सीजन सपोर्ट की यथोचित कार्यवाही करनी चाहिये व क्रिटिकल पीरियड के पास करने के सभी उपाय कर मरीज की जान बचाने चाहिए व इलाज के दुष्प्रभावों को न्यूनतम रखने के प्रयास किए जाएं।

5-चिकित्सकों को अच्छी तरह से विदित है कि नींबू का रस कोरोना वायरस की बाहरी सतह के साथ साथ RNA को भी नष्ट करने की क्षमता रखता है तो इस तथ्य को झुठलाने की बजाय इस ज्ञान का जनहित व उपचार में उपयोग न करना क्या इन भयानक परिस्थितियों में अत्यंत ही अनुचित नहीं है?


नींबू थेरेपी की वैज्ञानिक प्रमाणिकता स्थापित होने के बाद प्रधानमंत्री जी के स्तर पर की जाने वाली कार्यवाही--

1-प्रधानमंत्री अपने नेतृत्व में पोलियो ड्रॉप की भांति सभी नागरिकों को टीवी पर संदेश देते हुए नींबू रस की दो दो बूँदें नासिका छिद्रों से स्वस्थ व्यक्ति को सात दिन के एक बार, संक्रमित क्षेत्र में भ्रमण करने वाले तीन दिन में एक बार, संक्रमित व्यक्ति पहले तीन दिन में दो बार व अगले तीन दिन, दिन एक बार दिलाने से हम अपने देश को कोरोना की विभीषिका से मुक्ति दिला पाएंगे। 

2-उपरोक्तानुसार कार्यवाही लगातार छह दिन करने पर, किसी भी शरीर या वातावरण से कोरोना वायरस को समूल नष्ट किया जा सकेगा व इस त्रासदी पर निर्णायक विजय हासिल की जा सकेगी।

3-भविष्य में विदेश से आने वाले सभी व्यक्तियों का टेस्ट व लेमन थेरेपी का प्रोटोकॉल स्थापित करने पर हम भविष्य में भी घुसने के पहले नष्ट कर सकेंगे।

आज हमारा देश करोना महामारी की विभीषिका से ग्रसित है हर रोज लाखों नये करोना संक्रमित व्यक्ति संज्ञान में आ रहे है, मरने वालों की संख्या हजारों में है, लोगों को बैड, ऑक्सीजन व आवश्यक दवाइयां भी उपलब्ध न होने के कारण भौतिक, मानसिक एवं आर्थिक परेशानियों से जूझ रहे हैं कुछ ही क्षणों में हम इन हालातों पर विजय पा सकेंगे। 

मेरी प्रधानमंत्री जी से करबद्ध प्रार्थना है कि इसे अधीनस्थों पर न छोड़कर स्वयं अपने नेतृत्व में ऐसे कराएं ।

मैं प्रधानमंत्री जी का इस महान कृपा के लिये सदैव आभारी रहूँगा।


मैथिली शरण गुप्त     

राष्ट्रीय अध्यक्ष अपराध मुक्त मिशन 

एवं पूर्व महानिदेशक पुलिस सुधार 

मध्यप्रदेश

9425606040

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