गुरुवार, 2 जनवरी 2020

यूपी बाढ़ प्रभावित इलाकों के लोगों को मिलेगा स्वच्छ पेयजल :-निदेशक पंचायतीराज


कुशीनगर (स्वतंत्र प्रयाग): बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों के लोगों के लिए खुशखबरी है। अब इन्हें बरसात और बाढ़ की स्थिति में भी स्वच्छ पेयजल मिलेगा और उन्हें गंदा पानी नहीं पीना पड़ेगा। यह प्रयास करने वाला कोई रिसर्चर या वैज्ञानिक नहीं बल्कि उत्तर प्रदेश के खड्डा विधानसभा के विधायक हैं। इन्होंने अपने क्षेत्र के बाढ़ग्रस्त लोगों की पीड़ा क्या सुनी इसका हल भी निकाल लिया। अब इसे प्रदेश के सभी जिलों में अपनाने के लिए पत्र लिखा गया है।


उत्तर प्रदेश के कुशीनगर जिले की खड्डा विधानसभा काफी पिछड़ा इलाका है। नारायणी के किनारे स्थित इस क्षेत्र के अधिकांश गांव हर साल बाढ़ की चपेट में रहते हैं और इस दौरान लोगों को शुद्घ पेयजल की काफी किल्लत रहती है। हर ओर जल की उपलब्धता के बाद भी ये उसे ग्रहण नहीं कर सकते।


भारतीय जनता पार्टी  विधायक जटाशंकर ने इस समस्या का निदान निकाला है। विधायक बनने के बाद उन्होंने ग्रामीणों से बात की, जानकारों की राय ली और हल निकल आया। अब इस तरीके को प्रदेश के पंचायतीराज निदेशक ब्रह्मदेव तिवारी ने हर जिले में अपनाने के लिए पंचायतीराज अधिकारियों को पत्र लिखा है।इंडिया मार्क टू हैंडपंप के साथ 3 से 4 फीट ऊंचा चबूतरा एवं सोक पिट का निर्माण हुआ है।


जल निकासी के लिए नाली बनी है। जानकारों का कहना है कि इन बाढ़ग्रस्त गांवों में बाढ़ के पानी की ऊंचाई कभी भी ढाई फुट से अधिक नहीं रही। ऐसी स्थिति में बाढ़ के दौरान भी हैंडपंप से पीने का साफ पानी मिलेगा और घिरे लोग अपनी प्यास मिटा सकेंगे।विधायक जटाशंकर त्रिपाठी ने आईएएनएस से खास बातचीत में बताया, "बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में जल संरक्षण और शुद्घ पेयजल उपलब्ध कराने की बड़ी चुनौती है।


बाढ़ के दौरान सबसे ज्यादा पीने के पानी की किल्लत होती है। ऐसे कई जिले हैं जो इसकी चपेट में आते हैं। प्रयोग के तौर पर मैंने अपनी विधानसभा में इंडिया मार्क टू हैंडपंप के चबूतरे तीन से चार फीट उंचाई पर बनवाए हैं। सोक पिट बनाकर हैंडपंप से दूर जलनिकासी तय की। अभी केवल 5 हैंडपंप लगाए गए हैं।



निदेशक पंचायतीराज ब्रह्मदेव राम तिवारी ने कहा कि दो दिसंबर 2019 को प्रदेश के सभी जिला पंचायत राज अधिकारियों को पत्र लिखकर बाढ़ग्रस्त एवं जल भराव वाले इलाकों में इंडिया मार्क टू हैंडपम्प के चबूतरे को 3 से 4 फीट ऊंचा बनाने के निर्देश दिए गए हैं।


इससे जल स्रोत प्रदूषित नहीं होगा। भूमिगत जल के रिचार्ज करने की खातिर हैंडपम्प से निकले वेस्ट वॉटर के लिए सोकपिट बनाने के निर्देश भी दिए हैं।उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड में अपनी सेवाएं दे चुके सहायक अभियंता राज नारायण द्विवेदी ने कहा, "बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में हैंडपम्प का फांउडेशन ऊंचा बनाने से लोगों को पीने के पानी की दिक्कत नहीं होगी। दो सीढ़िया भी बनाई जानी चाहिए।


इससे एक तरफ से लोग पानी लेकर निकल सकेंगे। इतना ही नहीं, बाढ़ से अधिक उंचाई पर बोरिंग करने के बाद जो जमीन लेवल पर पाइप आता है, उसे सील कर दिया जाना चाहिए। इसके बाद सरफेस वाटर बोर में नहीं जा पाएगा। जिससे पानी प्रदूषित नहीं होगा।"


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