प्रयागराज संगम की रेती पर माघ से पहले कल्पवासियों का आगमन शुरू



प्रयागराज (स्वतंत्र प्रयाग): धार्मिक और आध्यात्मिक नगरी प्रयागराज में माघ मेला में कल्पवास करने आने वाले श्रद्धालुओं के वाहनों का रेला पहुंचने लगा है। पतित पावनी गंगा, श्यामल यमुना और अन्त: सलिला स्वरूप में प्रवाहित सरस्वती के विस्तीर्ण रेती पर 10 जनवरी से शुरू हो रहे माघ मेला के पहले स्नान “पौष पूर्णिमा” से एक माह का कल्पवास शुरू करेंगे।


इसके लिए कुछ कल्पवासी पहले ही यहां पहुंच कर अपने शिविर तैयार कर चुके हैं और जो पहुंच रहे हैं वह अपने शिविरों को सजाने में व्यस्त है।प्रयागराज में संगम तट एक बार फिर धर्म और आध्यात्म के समागम के लिए तैयार हो गया है। एक मास तक चलने वाले कल्पवास के दौरान त्रिवेणी की तट पर आध्यात्म की बयार बहती नजर आऐगी।


चारों तरफ शिविरों और बड़े पंड़ालो से भजन-कीर्तन, सत्संग, कथा आदि की स्वर लहरियां कानों में गुंजायमान होती रहेंगी। साधु-संतों की गूगल वाली धूनि से उठती आध्यात्मिक धुंआ पूरे मेला क्षेत्र को पवित्र वातावरण प्रदान करेगी।
कल्पवासी एक माह तक त्रिवेणी के तट पर ध्यान, स्नान और दान का पुण्य प्राप्त करेंगे।


खराब मौसम में भी मांडा, कोरांव, मेजा, कौशाम्बी, हंडिया, मऊआइमा, प्रतापगढ़, जौनपुर समेत आस-पास के जिलो समेत दूरदराज मध्य प्रदेश आदि से बड़ी संख्या में कल्पवासी गृहस्थी और शयन के सामान के साथ साधु-संतो का काफिला भी पहुंचने लगे हैं।