निर्भया कांड में तिहाड़ जेल नंबर 3 में दी जाएगी चारों दोषियों को फांसी, मेरठ से आएगा जल्लाद



नई दिल्ली (स्वतंत्र प्रयाग ) 16 दिसम्बर 2012 की भयावह काली रात में किए गए गुनाह के दोषियों को सजा तथा निर्भया काे इंसाफ देने की घड़ी करीब आ गई है और अपराधियों को अब फांसी पर चढ़ाया जाना ही शेष रह गया है।


निर्भया के साथ सामूहिक बलात्कार और बाद में उसकी मौत से देश को हिला देने वाले इस वीभत्स कांड के चारों दोषियों को फांसी पर लटकाये जाने के लिए मंगलवार को पटियाला हाउस अदालत ने डेथ वारंट जारी कर दिया। चारों दोषियों पवन, विनय, मुकेश और अक्षय को 22 जनवरी की सुबह सात बजे फंदे पर लटकाया जाएगा।


हालांकि दोषियों के पास कुछ कानूनी विकल्प अब भी बचे हुए हैं। यदि दोषी इनका इस्तेमाल नहीं करते हैं तो उन्हें 22 जनवरी को सुबह फांसी दे दी जाएगी, लेकिन यदि वे राष्ट्रपति के पास मर्सी पिटिशन दाखिल करते हैं तो इसके निपटारे तक डेथ वॉरंट होल्ड पर चला जाएगा। कानूनी जानकार बताते हैं कि डेथ वॉरंट जारी होने के बाद मर्सी पिटिशन और रिट का अधिकार बना हुआ है।


तिहाड़ जेल के एक अधिकारी ने बताया कि निर्भया केस के दोषियों मुकेश, विनय शर्मा, अक्षय सिंह और पवन गुप्ता को जेल नंबर 3 में फांसी दी जाएगी है। अभी 3 दोषी जेल नंबर 2 में हैं और एक को जेल नंबर 4 में रखा गया है।  तिहाड़ में फांसी का तख्ता जेल नंबर-3 में है, जिसमें संसद हमले के दोषी आतंकवादी अफजल को रखा गया था।


जेल नंबर-3 में प्रवेश करने के बाद सीधे हाथ की ओर फांसी की कोठरी के लिए रास्ता जाता है। यहां फांसी की कोठरी से लगते हुए ही 16 हाई रिस्क सेल हैं। यहीं करीब 50 स्कवॉयर मीटर जगह में फांसी की कोठरी बनाई गई है। इसके गेट पर हमेशा ताला लगा रहता है।


सूत्रों के मुताबिक फांसी के लिए जल्लाद मेरठ से आएगा।जनमानस को झकझोर देने के साथ ही सत्ता के गलियारों में हलचल मचा देने वाले इस दुष्कर्म और हत्याकांड के घटनाक्रमों से जुड़े तथ्यों का।




 


सिलसिलेवार विवरण इस प्रकार है..


16 दिसम्बर 2012.. पैरामेडिकल छात्रा के साथ छह लोगों ने उस समय सामूहिक दुष्कर्म और वीभत्स तरीके से मारपीट की जब वह अपने मित्र के साथ एक निजी बस में सफर कर रही थी। पीड़िता को सफदरजंग अस्पताल में भर्ती कराया गया।


17 दिसम्बर 2012.. घटना की खबर फैलते ही लोगों में तीव्र आक्रोश फैल गया और अपराधियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग को लेकर प्रदर्शन की शुरुआत हुई। पुलिस ने चार आराेपियों बस चालक राम सिंह, उसके भाई मुकेश विनय शर्मा और पवन गुप्ता के रूप में की पहचान की ।


18 दिसम्बर 2012.. राम सिंह और तीन अन्य को गिरफ्तार कर लिया गया।
20 दिसम्बर 2012.. पीड़िता के मित्र का परीक्षण किया गया।
21 दिसम्बर 2012.. नाबालिग आरोपी को दिल्ली के आनंद विहार बस टर्मिनल से पकड़ा गया। पीड़िता के मित्र की निशानदेही पर हरियाणा में मुकेश और छठवें आरोपी अक्षय ठाकुर को बिहार स्थित ठिकाने पर पुलिस ने छापा मारा।


21-22 दिसम्बर 2012.. अक्षय को बिहार के औरंगाबाद से गिरफ्तार कर दिल्ली लाया गया। अस्पताल में एसडीएम के समक्ष पीड़िता का बयान दर्ज किया गया।
दिसम्बर 2012.. घटना के विरोध में प्रदर्शन पर नियंत्रण की कार्रवाई के दौरान दिल्ली पुलिस के कांस्टेबन सुभाष तोमर गंभीर रूप से घायल हो गये और उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया।


25 दिसम्बर 2012.. पीड़िता की हालत गंभीर घोषित की गयी। दूसरी तरफ घायल कांस्टेबल तोमर ने अस्पताल में दम ताेड़ दिया।


26 दिसम्बर 2012.. पीड़िता को दिल का दौरा पड़ने के कारण सरकार की तरफ से उसे सिंगापुर के माउंट एलिजाबेथ अस्पताल भेजा गया।


29 दिसम्बर 2012.. पीड़िता ने 02.15 बजे दम तोड़ दिया। इसके बाद पुलिस ने प्राथमिकी में हत्या का अपराध दर्ज किया।02 जनवरी: तत्कालीन मुख्य न्यायाधीश अल्तमस कबीर ने यौन अपराध मामलों में त्वरित सुनवाई के लिए फास्ट ट्रैक अदालतों की स्थापना की।


03 जनवरी: पुलिस ने पांच वयस्कों के खिलाफ हत्या, सामूहिक बलात्कार, हत्या के प्रयास, अपहरण और डकैती के मामले में आरोप पत्र दाखिल किए।
05 जनवरी: न्यायालय ने आरोप पत्र पर संज्ञान लिया।


07 जनवरी: न्यायालय ने मामले की सुनवाई कैमरे के समक्ष करने का आदेश दिया।
17 जनवरी: फास्ट ट्रैक अदालत ने पांचों बालिग आरोपियों के खिलाफ मामले की सुनवाई शुरू की।
28 जनवरी: किशोर न्यायालय बोर्ड ने कहा कि नाबालिग की कम उम्र होने की पुष्टि हुई।


22 मार्च: दिल्ली उच्च न्यायालय ने मीडिया को अदालती कार्यवाही की रिपोर्टिंग करने की अनुमति दी।
05 जुलाई: किशोर के खिलाफ किशोर न्यायालय बोर्ड में जांच पूरी हुई और बोर्ड ने अपना फैसला 11 जुलाई तक सुरक्षित रखा।


08 जुलाई: फास्ट ट्रैक अदालत ने अभियोजन पक्ष की तरफ से गवाहों के बयान दर्ज किए।
11 जुलाई: किशोर न्यायालय बोर्ड ने नाबालिग को उसी दिन (जब निर्भया के साथ यह घटना हुई थी) एक बढ़ई को अवैध तरीके से बंद रखने तथा लूटपाट करने के मामले में दोषी पाया।


दिल्ली उच्च न्यायालय ने इस मामले की कवरेज के लिए तीन अंतरराष्ट्रीय समाचार एजेंसियों को अनुमति दी।
22 अगस्त: फास्ट ट्रैक अदालत ने चारों बालिग आरोपियों के खिलाफ इस मामले में अंतिम बहस शुरू की।