गुरुग्राम पुलिस सुबह 4 बजे से ही लोगों का दरवाजा खटखटा रही, फोटो युक्त आईडी प्रूफ की हो रही मांग



गुड़गांव (स्वतंत्र प्रयाग): राजधानी से सटे गुरुग्राम में 'कागज' शब्द इन दिनों लोगों को खूब डरा रहा है। हालत यह है कि कागज शब्द सुनते ही लोग सहम उठते हैं। ये हाल है शहर की मलिन बस्तियों और कॉलोनियों का, जहां इन दिनों पुलिस सुबह चार बजे से ही लोगों के दरवाजे खटखटाकर कागज मांग रही है। जैसे ही कोई पुलिसवाला कागजात मांगने आता है तो वहां रहने वाले लोगों के हाथ-पांव मानों फूल जाते हैं।


 दरअसल, इन दिनों वहां पुलिसवाले घर-घर जाकर लोगों ने फोटो वाला कोई आईडी प्रूफ मांग रहे हैं। पुलिस इसे 26 जनवरी से पहले हर साल होनेवाली रूटीन चेकिंग बता रही है। पुलिस का कहना है कि ऐसा अवैध घुसपैठियों की पहचान के लिए किया जा रहा है।


लेकिन नैशनल रजिस्टर ऑफ सिटिजन (एनआरसी) को लेकर जारी हंगामे और प्रदर्शनों के बीच लोगों में डर का माहौल है। यह डर खासकर उन लोगों में है जो मजदूरी, अन्य छोटे-मोटे काम करके शहर में अपना गुजर बसर कर रहे हैं।
1500 लोगों की चेकिंग, नहीं मिला कोई 'घुसपैठिया'
अभियान इस बार पहले के मुकाबले बड़े पैमाने पर है, इसलिए भी लोगों में बेचैनी ज्यादा है।


पुलिस का कहना है कि अबतक वे 1,500 लोगों के कागजात चेक कर चुके हैं, लेकिन उनमें से कोई अवैध नहीं मिला। पुलिस जांच के बीच कुछ मजदूर गुड़गांव छोड़कर वापस अपने घर जाने को भी मजबूर हैं। ऐसी ही एक मजदूर महिला ने कहा कि वह फिलहाल डीएलएफ 2 की झुग्गी में रहती है। लेकिन अब पश्चिम बंगाल वापस जाएगी और यह मामला शांत होने के बाद ही वापस आएगी।


इस जांच की टाइमिंग भी चर्चा का विषय है। पुलिसवाले कागज मांगने सुबह 4 बजे से 8 बजे के बीच जा रहे हैं। यह जांच टिगरा, इस्लामपुर, समासपुर, घोसला, सरस्वती कुंज और आसपास के इलाकों मे जारी है।


इस टाइम जांच के पीछे की वजह बताते हुए डीसीपी (ईस्ट) चंद्र मोहन ने कहा कि उस वक्त ज्यादातर लोग घर पर मिल जाते हैं। इस तरह की जांच को पुलिस कमिश्नर मोहम्मद अकिल ने सामान्य बताया। वह बोले कि हम लोग दिल्ली के पास हैं। इसलिए ज्यादा सावधानी बरतनी होती है। वह बोले कि गणतंत्र दिवस से पहले ऐसी चेकिंग होती रही है।