ईरानी मिसाइल हमले में अमेरिकी सैनिकों को लगा मानसिक आघात,जर्मनी में चल रहा इलाज़


वाशिंगटन (स्वतंत्र प्रयाग) अमेरिकी रक्षा मंत्रालय ने शुक्रवार को कहा कि इस महीने के शुरू में इराक में सैन्य अड्डे पर ईरान के हमले से उनके सैनिकों को गहरा मानसिक आघात लगा है। अमेरिका द्वारा अपने शीर्ष कमांडर कासिम सुलेमानी को मार गिराने के बाद ईरान ने इराक में उन सैनिकों अड्डों पर मिसाइल से हमला किया था।


जहां अमेरिकी सैनिक रहते हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और अन्य अधिकारियों ने पहले कहा था कि हमले में न कोई अमेरिकी सैनिक मारा गया है और न ही कोई घायल हुआ है।


11 सैनिकों को लगा मस्तिष्क आघात


पिछले हफ्ते अमेरिकी सेना ने कहा था कि 11 सैनिकों को मस्तिष्क में आघात के इलाज के लिए बाहर ले जाया गया है। पश्चिमी इराक के अनल-असद एयर बेस पर हुए ईरानी हमले के बाद इनमें ये लक्षण पाए गए थे। सेना ने इस हफ्ते और सैनिकों को इलाज के लिए इराक से बाहर ले जाने की बात कही थी।


अमेरिकी रक्षा मंत्रालय के मुख्यालय पेंटागन के प्रवक्ता जोनाथन हॉफमैन ने कहा कि जिन आठ सैनिकों को इलाज के लिए जर्मनी ले जाया गया था, उन्हें वापस अमेरिका लाया गया है। नौ सैनिकों का अभी भी जर्मनी में इलाज चल रहा है। ट्रंप ने बुधवार को सैनिकों के मानसिक आघात के मामले को कमतर बताने की कोशिश की।


ट्रंप ने कहा कि उन्होंने सैनिकों के सिर में दर्द और उसी तरह की कुछ अन्य परेशानियों के बारे में सुना है। वहीं, पेंटागन के अधिकारियों ने इस बात से इन्कार किया है कि सैनिकों के मानसिक आघात के मामले को दबाने या इसकी सूचना देर से देने की कोशिश की गई।


पिछले दिनों ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामनेई ने कहा था कि उनका देश लड़ाई को अपनी सीमाओं के पार भी ले जा सकता है। ट्रंप को विदूषक करार देते हुए खामनेई ने कहा कि ईरान के लोगों के साथ वह सहानुभूति जताने का दिखावा कर रहे हैं। मौका आने पर ट्रंप ईरानियों की पीठ में जहरीला छुरा घोंप देंगे।


परमाणु समझौते से हटने पर ईरान के खिलाफ कार्रवाई की तैयारी कर रहे ब्रिटेन, फ्रांस और जर्मनी को आड़े हाथों लेते हुए खामनेई ने कहा कि यूरोप के देशों पर भरोसा नहीं किया जा सकता है। उन्होंने यह भी कहा कि यूरोपीय देशों में इतनी ताकत नहीं है कि वो ईरान को झुका सकें। यूरोपीय देशों की इस पहल से ईरान पर फिर से संयुक्त राष्ट्र के प्रतिबंध लग सकते हैं। उन्होंने कहा कि खाड़ी क्षेत्र के दुश्मन के अत्याचारों से पूरी तरह मुक्त होने तक विरोध जारी रहेगा।