डोनाल्ड ट्रंप खेलना चाहतें हैं ईरानी कार्ड, जबकि ईरान मुद्दे पर ओबामा को दी थीं नसीहत



वाशिंगटन, (स्वतंत्र प्रयाग)अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कभी तत्कालीन राष्ट्रपति बराक ओबामा को ईरान के खिलाफ युद्ध शुरू कर राजनीतिक संभावनाओं को अपने पक्ष में करने के लिए चेतावनी दी थी।


लेकिन अब आठ साल बाद वही ट्रंप ईरानी जनरल कासिम सुलेमानी की मौत को राजनीतिक हथियार के तौर पर इस्तेमाल करने से नहीं चूक रहे। ऐसे में अब आरोप लग रहा है कि वे लाभ के लिए विदेश नीति को हथियार बना रहे हैं।


ट्रंप के चुनाव अभियान के प्रवक्ता टिम मुर्तो ने कहा, अमेरिकी अपने राष्ट्रपति को निर्णायक और राष्ट्र के हितों की रक्षा करने वाले व्यक्ति के तौर पर देखना चाहते हैं। रिपब्लिकन नेशनल कमेटी के संचार निदेशक माइकल अहरेंस के मुताबिक आम लोगों की नजर में रिपब्लिकन की छवि आतंकियों के प्रति बहुत सख्त है।


और अमेरिकी हमले में सुलेमानी का मारा जाना इसी की याद दिलाता है। चुनाव अभियान में सुलेमानी की हत्या से जुड़ी बातों को किस कदर प्रयोग किया जाएगा, इसका पता इसी से लगाया जा सकता है कि ट्रंप का चुनाव प्रचार देखने वाली कमेटी ने फेसबुक पर इसके लिए जगह खरीदी है।
इस हमले को हालांकि राजनीतिक मकसद से जोड़ने को ट्रंप के नजदीकी सिरे से खारिज करते हैं।


लेकिन डेमोक्रेटिक प्रतिद्वंद्वियों के मुकाबले वे ट्रंप द्वारा की गई कार्रवाई से खुश हैं। इन लोगों का मानना है कि इस कार्रवाई से ट्रंप मजबूत नेता के तौर पर स्थापित होंगे। ये लोग डेमोक्रेट की विदेश नीति असफल होने और ईरान के तुष्टीकरण का भी आरोप लगाते हैं।


यह बात ठीक है कि ट्रंप से जुड़ी खबरों का जीवनकाल बहुत कम होता है, लेकिन उनके सहयोगियों का मानना है कि सुलेमानी पर किया गया हमला आगामी अभियान में महती भूमिका निभा सकता है। यह और ज्यादा कारगार हो सकता है यदि ईरान जवाबी कार्रवाई कर दे या क्षेत्र में तनाव का माहौल बन जाए।


आइएस सरगना बगदादी की हत्या ट्रंप के प्रचार विज्ञापनों और उनकी रैलियों का हिस्सा बन चुका है। ऐसे में माना जा रहा है कि सुलेमानी की मौत को भी वे प्रचार का हिस्सा बनाएंगे। ट्रंप के दो प्रतिद्वंद्वियों एलिजाबेथ वारेन और बर्नी सैंडर्स ने अमेरिकी हमले में सुलेमानी के मारे जाने को हत्या करार दिया है।