मंगलवार, 31 दिसंबर 2019

उद्धव कैबिनेट के विस्तार के बाद, एनसीपी वो कांग्रेस में कलह शुरू, कांग्रेसी नेताओं ने सोनिया से की  मुलाकात


नई दिल्‍ली (स्वतंत्र प्रयाग): कर्नाटक की तरह महाराष्‍ट्र में भी बीजेपी को सत्‍ता से बाहर रखने के लिए एनसीपी और कांग्रेस ने शिवसेना के नेता उद्धव ठाकरे के नेतृत्‍व में सरकार बनवाई, लेकिन वर्तमान हालात से लगता है कि महाराष्ट्र भी कर्नाटक की राह पर चल पड़ा है।


हालिया मंत्रिमंडल विस्तार के बाद तीनों गठबंधन दलों में बगावत के सुर उभरने लगे हैं। कैबिनेट में जगह नहीं मिलने से नाराज एनसीपी विधायक प्रकाश सोलंके ने सोमवार रात ऐलान किया कि वह विधानसभा की सदस्यता से इस्तीफा दे देंगे, क्योंकि वह अब राजनीति के योग्य नहीं हैं। सोलंके चार बार से मजलगांव सीट से विधायक हैं।


संग्राम थोप्टे के समर्थकों ने किया प्रदर्शनइससे पहले सोमवार को ही तीनों दलों के 36 विधायकों ने मंत्रिपद की शपथ ली। इनमें एनसीपी के 14 मंत्री, शिवसेना के 12 और कांग्रेस के 10 मंत्री हैं। इसके बाद से ही तीनों दलों में बगावत के सुर उभरने लगे।


शिवसेना की बात करें तो सांसद संजय राउत के भाई सुनील राउत मंत्रिमंडल में जगह न मिलने से नाराज बताए जा रहे हैं। इसी के चलते कैबिनेट विस्‍तार के दौरान संजय राउत वहां मौजूद नहीं थे। वहीं एनसीपी विधायक प्रकाश सोलंके के बारे में तो यहां तक कहा जा रहा है कि वो जल्‍द ही इस्‍तीफा दे सकते हैं। स्वाभिमानी शेतकरी संगठन के नेता राजू शेट्टी भी कैबिनेट में जगह न मिलने से नाराज बताए जा रहे है।


उद्धव सरकार के गठन अहम भूमिका निभाने वाले संजय राउत के शपथ ग्रहण समारोह में उपस्थित न होने से उनकी नाराजगी के कई सियासी मायने निकाले जा रहे हैं। संजय राउत के भाई सुनील राउत मुंबई के विक्रोली से विधायक हैं। माना जा रहा था कि सुनील राउत मंत्री बनने के प्रबल दावेदारों में से थे।


हालांकि संजय राउत ने सुनील राउत को मंत्री न बनाए जाने को लेकर अभी तक कोई सार्वजनिक बयान नहीं दिया है।सुनील राउत के अलावा शिवसेना के कई और दावेदार मंत्री पद न मिलने से नाराज बताए जा रहे हैं।
 शिवसेना-कांग्रेस-एनसीपी के गठबंधन महा विकास अघाड़ी की सहयोगी स्वाभिमानी शेतकरी संगठन नेता राजू शेट्टी भी नाराज हैं. उन्‍होंने कहा, बीजेपी को सत्ता से दूर रखने के लिए निस्वार्थ रूप से प्रयास करने वाले सभी सहयोगियों की अनदेखी की गई।


मंत्रिमंडल विस्‍तार में अनदेखी के चलते पीडब्ल्यूपी की अध्यक्ष जयंत पाटिल, बहुजन विकास अघाड़ी के अध्यक्ष हितेंद्र ठाकुर भी नाराज हैं। सोनिया गांधी को नेताओं की नाराजगी से अवगत करवाया
सोमवार को मंत्रिमंडल विस्तार के बाद कांग्रेस के मंत्रियों ने पार्टी की अंतरिम अध्यक्ष सोनिया गांधी और पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी से मंगलवार को नई दिल्ली में मुलाकात की।


पता चला है कि इस दौरान प्रदेश कांग्रेस के भीतर चल रहे असंतोष के बारे में हाईकमान को  अवगत करवाया गया। दो बार के विधायक मुंबई के अमीन पटेल कैबिनेट में जगह मिलने की उम्मीद कर रहे थे, लेकिन उनसे जूनियर विधायकों असलम शेख और वर्षा गायकवाड को मंत्रिमंडल में शामिल किया गया और उन्हें नजरअंदाज कर दिया गया। सूत्रों ने बताया कि विधानसभा चुनाव में चौथे स्थान पर रही कांग्रेस अब वरिष्ठ नेताओं को पार्टी में पद और संगठनात्मक जिम्मेदारी देने की योजना बना रही है।


एक नेता ने कहा कि बैठक का उद्देश्य राज्य में पार्टी की पहुंच बढ़ाने के कार्यक्रम पर चर्चा करना था और गठबंधन पर फीडबैक देना था। वहीं एक मंत्री ने कहा कि यह बैठक पार्टी अध्यक्ष को धन्यवाद देने और राज्य में आगे कैसे काम किया जाए ।


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