लोकसभा ने पास किया कंपनी कर संशोधन बिल, वित्त मंत्री बोली- इसका फायदा सभी को मिलेगा

नई दिल्ली (स्वतंत्र प्रयाग) : सरकार ने आज साफ किया कि अमेरिका और चीन में व्यापार युद्ध के कारण दुनियाभर में तेजी से हो रहे कारोबारी बदलावों के बीच भारत में कारोबारी प्रतिस्पर्धी वातावरण बनाए रखने एवं विनिर्माण क्षेत्र में नया निवेश आकर्षित करने के उद्देश्य से कॉर्पोरेट कर में कटौती की गई है। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने 'कराधान विधि (संशोधन) विधेयक, 2019Ó पर लोकसभा में चली चर्चा के जवाब में यह बात कही।


इसी के साथ ही लोकसभा ने कंपनी कानून संशोधन बिल 2019 को पास कर दिया है। इससे कार्पोरेट कर में सरकार द्वारा की गई कमी का एक पड़ाव पार हो गया है। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा कि इस कर में कमी से सभी कंपनियों को फायदा होगा, जो कंपनी कानून के तहत रजिस्टर हैं। 


सीतारमण ने कहा कि 1 अक्टूबर, 2019 के बाद पंजीकृत होने वाली और 2023 तक उत्पादन आरंभ करने वाली विनिर्माण कंपनियों को ही कॉर्पोरेट कर में रियायत दी गई है, बाकी को नहीं छेड़ा गया है। इसका उद्देश्य नया निवेश प्राप्त करना है। यह लाभ छोटी से लेकर बड़ी सभी कंपनियों को मिलेगा। श्रीमती सीतारमण ने कहा कि यह लाभ कंपनी कानून के तहत पंजीकृत कंपनी को मिलेगा।


साझेदारी कंपनी या लिमिटेड लाएबिलिटी पार्टनरशिप कंपनी को इसका लाभ नहीं मिलेगा। उन्होंने यह भी बताया कि सेवा क्षेत्र में विदेशी कंपनी के लिए मिनिमम अल्टरनेटिव कर (एमएटी) को 15 प्रतिशत तक रखा जाएगा। 


वित्त मंत्री ने अध्यादेश लाने के औचित्य के बारे में विपक्ष के सवालों का जवाब देते हुए कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की सरकार खुद पहल करने वाली सरकार है और वैश्विक स्तर पर चीन तथा अमेरिका के बीच व्यापार युद्ध के कारण तेजी से बदल रही परिस्थितियों के मद्देनजर देश में कारोबारी प्रतिस्पद्र्धी वातावरण बनाए रखने एवं विनिर्माण क्षेत्र में नया निवेश आकर्षित करने के उद्देश्य से यह कदम उठाया गया।


इसके लिए अगले बजट तक प्रतीक्षा नहीं की जा सकती थी। वित्त मंत्री के जवाब के बाद सदस्यों ने स्पष्टीकरण पूछे।कंपनी कर संशोधन बिलइसके बाद सदन ने विधेयक को पारित कर दिया। सीतारमण ने सरकार के इस कदम से राजकोषीय घाटा बढऩे की आशंकाओं को सिरे से खारिज कर दिया और कहा कि मोदी सरकार ने राजकोषीय अनुशासन को कायम रखा है जिससे राजकोषीय घाटा बीते पाँच साल में औसतन 3.68 प्रतिशत पर रहा है।


सकल घरेलू उत्पाद की दर 4.5 प्रतिशत पर आने को लेकर वित्त मंत्री ने सफाई दी कि 2012-13 की तीसरी तिमाही में जीडीपी 4.9 प्रतिशत, चौथी तिमाही में 4.3 प्रतिशत पर थी जबकि 2013-14 की पहली तिमाही में यह 7.4 प्रतिशत पर पहुँच गया था। इसलिए समझना चाहिए कि जीडीपी के ताजा आँकड़े कोई चिंता की बात नहीं है।


अध्यादेश लाने की प्रवृत्ति के आरोपों पर उन्होंने कहा कि अध्यादेश कोई नयी बात नहीं है। कांग्रेस के शासनकाल में भी 1991 से 1996 के बीच 77 अध्यादेश लाये गये। वर्ष 2004 से 2009 के बीच 36 अध्यादेश लाए गए।


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