सोमवार, 9 दिसंबर 2019

लखनऊ में एनआरसी के खिलाफ  भी सड़कों पर उतरे लोग


लखनऊ(स्वतंत्र प्रयाग)नागरिकता संशोधन बिल (सीएबी)-2019 सोमवार को लोकसभा में पास हो गया। गृहमंत्री अमित शाह ने सीएबी को लोकसभा में और यह ध्वनिमत से पारित भी हो गया। हालांकि इसे अमल में लाने के लिए अभी राज्य सभा और राष्ट्रपति की मंजूरी बाकी है। लेकिन इस बीच देश भर में सीएबी और राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर (एनआरसी) के खिलाफ विरोध प्रदर्शन भी शुरू हो गए हैं।


विपक्षी दलों के साथ तमाम सामाजिक व धार्मिक संगठनों और बुद्धिजीवियों ने इन दोनों बिलों को संविधान विरोधी और भारतीयता के खिलाफ बताया है। सोमवार को लखनऊ में तमाम साामाजिक संगठनों के दर्जनों कार्यकर्ताओं व सदस्यों ने हांथों में तख्तियां लेकर सीएबी और एनआरसी का विरोध किया। नागरिकता बचाओ आंदोलन के बैनर तले प्रदर्शन कर रहे युवकों और महिलाओं ने सीएबी देश की अस्मिता पर चोट है…मोदी सरकार तेरी नीयत में खोट है…,सीएबी और एनआरसी हमें मंजूर नहीं…


जैसे नारे लिखी तख्तियां हांथों में ले रखी थीं। 
प्रदर्शन की अगुवाई कर रहे समाजसेवी अमीक जामई ने कहा कि सीएबी और एनआरसी संविधान ही नहीं बल्कि भारत की आत्मा के भी खिलाफ है। यह बिल स्वामी विवेकानंद के उस ऐतिहासिक भाषण के भी खिलाफ है, जब वह शिकागो में गर्व से कहते हैं कि भारत में दुनिया के हर व्यक्ति के लिए जगह है। अमीक जामई ने कहा कि लेकिन आज की नाजी सरकार (मोदी सरकार) धर्म के नाम पर मुस्लिम समाज को, श्रीलंका से आए हुए तमिलों को देश की नागरिकता से बाहर करना चाहती है।



अब कोई भी लाइन में नहीं लगेगा


कहा कि जिस तरह से मोदी सरकार ने देश के गरीबों को नोटबंदी करके लाइन में लगाया, उसी तरह से अब यह सरकार मुस्लिमों को लाइन में लगाना चाहती है। अमीक जामई ने कहा कि सरकार के इस फैसले के खिलाफ तमाम बुद्धिजीवी, सेक्युलर हिन्दू भाई और पत्रकार हमारे साथ खड.े हैं। यह देश गांधी जी, अम्बेडकर और भगत सिंह का है, मोदी सरकार अगर जनता से टकराएगी तो कहीं की नहीं रहेगी।


जामई ने चेतावनी देते हुए कहा कि हम सरकार से कहते हैं कि उत्तर प्रदेश में ही नहीं पूरे देश में कोई भी लाइन में नहीं लगेगा, जितना जेल बनाना हो, बना लीजिए। प्रदर्शन के दौरान युवाओं ने अमित शाह होश में आओ…., सीएबी, एनआरसी नहीं चलेगा…, कैब, एनआरसी वापस लो…जैसे नारे भी लगाए


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