मंगलवार, 24 दिसंबर 2019

केंद्रीय कैबिनेट ने राष्ट्रीय जनसंख्या रजिस्टर अपडेट करने को दी मंजूरी, नहीं पड़ेगी कागज या प्रूफ की जरूरत  


नई दिल्ली (स्वतंत्र प्रयाग): प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की अध्यक्षता में हुई केन्द्रीय कैबिनेट की बैठक में राष्ट्रीय जनसंख्या पंजी (एनपीआर) को अपडेट करने के लिए 8500 करोड़ रुपये के कोष को मंजूरी दे दी। अधिकारियों ने इस आशय की जानकारी दी। एनपीआर की कवायद अगले साल अप्रैल से शुरू होगी। एनपीआर देश के स्वाभाविक निवासियों की सूची है। इस संबंध में आंकड़ों को अपडेट करने का काम 2015 में घर-घर सर्वे के माध्यम से हुआ था। अपडेट किये गए आंकड़ों के डिजिटलीकरण का काम पूरा हो गया है। एनपीआर के उद्देश्य से 'सामान्य निवासी' को ऐसे व्यक्ति के रूप में परिभाषित किया जाता है जो किसी क्षेत्र में पिछले छह महीने या अधिक समय से निवास कर रहा हो या ऐसा व्यक्ति जो उस इलाके में अगले छह महीने या उससे अधिक समय तक रहना चाहता है। महापंजीयक और जनगणना आयुक्त कार्यालय की वेबसाइट के अनुसार अब 2021 की जनगणना के घरों को सूचीबद्ध करने के चरण के साथ अप्रैल 2020 से सितंबर 2020 तक एनपीआर को अपडेट करने का फैसला किया गया है। यह काम असम को छोड़कर शेष सभी राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों में किया जाएगा।      


केंद्रीय मंत्री प्रकाश जावडेकर ने बताया 16वीं जनगणना के लिए तैयारी कर ली गई है। इसबार ऐप के जरिये जनगणना का काम कराया जाएगा। जो 6 महने तक चलेगा। मालूम हो आजादी एक अब तक 8वीं बार जनगणना हुआ है। उन्‍होंने बताया NPR  2010 में शुरू हुआ। जावडेकर ने बताया इसके लिए कोई कागज, प्रूफ देने की जरूरत नहीं है। एनपीआर में बायोमेट्रिक भी देने की जरूरत नहीं है। उन्‍होंने अभी अंग्रेजों के जमाने की जनगणना है। एनपीआर स्‍कीम का लाभ लोगों को मिलेगा।इस संबंध में इस साल अगस्त में राजपत्रित अधिसूचना जारी की गई थी। अधिसूचना में कहा गया, नागरिकता (नागरिक पंजीकरण और राष्ट्रीय परिचय पत्र जारी करना) नियम, 2003 के नियम 3 के उप-नियम (4) के अनुरूप केंद्र सरकार राष्ट्रीय जनसंख्या पंजी को तैयार करने और अपडेट करने का फैसला करती है। एनपीआर में भारत के हर सामान्य निवासी के लिए पंजीकरण कराना अनिवार्य होगा।


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