देश के पहाड़ी राज्यों में बर्फबारी की भविष्यवाणी, अभी और बढ़ेगी ठंड- हिमाचल में 256 सड़कें बंद


शिमला (स्वतंत्र प्रयाग) : हिमाचल प्रदेश के ऊंचे इलाकों में हुए हिमपात के बाद खून जमा देने वाली ठंड पड़ रही है। पर्यटन स्थलों मनाली और कुफरी सहित जनजातीय जिलों जिलों लाहौल-स्पीति व किन्नौर का पारा शून्य से नीचे चला गया है। राज्य में 19 दिसम्बर से फिर बर्फबारी की संभावना है, जिससे ठंड का प्रकोप और तेज हो जाएगा।


लाहौल-स्पीति का मुख्यालय केलंग सोमवार को सबसे ठंडा रहा, जहां न्यूनतम तापमान शून्य से 14.9 डिग्री नीचे दर्ज किया गया। शीत मरुस्थल कहे जाने वाले इस इलाके में अत्यधिक ठंड से प्राकृतिक स्त्रोतों का पानी तक जम गया है।


दूसरे जनजातीय क्षेत्र किन्नौर में भी यही हाल है और वहां के कल्पा में पारा शून्य से 6 डिग्री नीचे रहा। विख्यात पर्यटन स्थलों मनाली और कुफरी में भी लोग ठंड से कांप रहे हैं।उत्तर भारत में और बढ़ेगी ठंड, मध्य भारत के कई राज्यों में बारिश का अनुमान


 मौसम विज्ञान केंद्र शिमला के निदेशक मनमोहन सिंह ने सोमवार को बताया कि अगले दो दिन राज्य भर में मौसम के साफ रहने से अधिकतम तापमान में उछाल आएगा, लेकिन न्यूनतम तापमान में कोई विशेष परिवर्तन नहीं आएगा। उन्होंने कहा कि 19 दिसम्बर को मौसम फिर करवट लेगा और मध्यवर्ती व उच्च पर्वतीय क्षेत्रों में बर्फबारी की संभावना है।


20 दिसम्बर को समूचे प्रदेश में बारिश व बर्फबारी होगी। 21 दिसम्बर को भी बर्फबारी का अनुमान है। 22 दिसम्बर को पूरे प्रदेश में मौसम साफ हो जाएगा। हिमाचल प्रदेश में अभी भी 256 सड़कों पर यातायात ठप है। ये 256 सड़कें 6 जिलों की हैं। इनके साथ 4 नेशनल हाईवे भी बंद है। 794 बिजली लाइनें अभी भी खराब हैं।  


मीडिया रिपोट्र्स के मुताबिक जम्मू-कश्मीर, हिमाचल और उत्तराखंड में तीन दिन से बर्फबारी और बारिश जारी है। इन राज्यों में अगले 24 घंटे के दौरान हिमस्खलन और बर्फीले तूफान की चेतावनी जारी की गई है जिससे मैदानी भागों में भी ठंडी हवा चलेगी। पश्चिमी उत्तर प्रदेश पर एक चक्रवाती हवाओं का क्षेत्र बना हुआ है, तथा हिमालय के तराई क्षेत्रों में बिहार होते हुए अरुणाचल प्रदेश तक एक ट्रफ बनी हई है।


अत: अगले 24 घंटों के दौरान उत्तर भारत के मैदानी इलाकों में ठंडी चलेंगी तथा इन हवाओं का असर मध्य भारत तक दिखाई देगा। हवाओं के कारण इन सभी भागों में न्यूनतम 2-3 डिग्री तक गिर सकता है। पहाड़ी राज्यों में भी पहले की तरह ही शीतलहर का प्रकोप जारी रहेगा।


भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (आईएआरआई) के कृषि वैज्ञानिक के अनुसार बीते दिनों की बारिश को देखते हुए किसानों को सलाह है कि वे सभी फसलों व सब्जियों में सिंचाई कुछ दिनों तक न करें, क्योंकि फसलों में अभी नमी की मात्रा पर्याप्त है। मौसम को ध्यान में रखते हुए किसानों को सलाह है कि वे सरसों में पेटेंड बग कीट की निरंतर निगरानी करते रहें